21 January 2017, Sat

बदले की कहानी नए अंदाज में, बदलापुर

Created at February 21, 2015

बदले की कहानी नए अंदाज में, बदलापुर
Updated at February 21, 2015
 

दीपक मिश्र
तीन स्टार

लंबे अरसे के बाद श्रीराम राघवन ने अपना क्लास दिखाया है। वो क्लास जो एजेंट विनोद में सैफ अली खान को हीरो बनाने के चक्कर में नहीं दिखा पाए थे। हालांकि राघवन को इसके लिए इस बात का भी शुक्रगुजार होना चाहिए कि फिल्म में धवन फैक्टर आड़े नहीं आया।

ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि जब यह फिल्म शुरू हुई थी, तब वरुण धवन नए थे। हालांकि संयोग से ही सही, यही बात वरुण के लिए प्लस प्वॉइंट है, क्योंकि उनकी रोमकॉम इमेज से अलग यह उन्हें एक सॉलिड अंदाज में पेश करती है। इसके साथ ही हमें शुक्रगुजार होना चाहिए कि नवाजुद्दीन सिद्दिकी नाम का एक एक्टर है, जो किसी भी रोल को इस बेहतरी से निभा जाते हैं कि दिल को छू जाते हैं।

कहानी की बात
एक दिन दो लुटेरे लायक (नवाजुद्दीन) और हरमन (विनय पाठक) बैंक लूटकर भाग रहे होते हैं, उसी दौरान उनके हाथों और एक युवती मिशी (यामी गौतम) और उसके बेटे की मौत हो जाती है। मिशी, राघव/रघु (वरुण धवन) की पत्नी है। जेल में लायक पुलिस को उल्टी सीधी कहानियां सुनाता है और आखिर में उसे २० साल की जेल हो जाती है। उधर राघव बदले की आग में तड़पता रहता है। उसे यह मौका मिलता है एक संयोग से, जो उसके पास आता है सोशल वर्कर शोभा (दिव्या दत्ता) के रूप में। मगर अंत में लायक उसे एक राज बताता है, जो राघव को हिलाकर रख देता है।

फिल्म की शुरुआत लाजवाब है। खासकर पहले 15 मिनट तो बिल्कुल बांध देते हैं। हालांकि कुछ—कुछ जगहों पर फिल्म में झोल हैं और कहानी की गति टूटती है। इसके अलावा अंत भी थोड़ा खिंच गया है। बाकी भूमिकाओं में हुमा कुरैशी (झिमली), विनय पाठक (हरमन) और (राधिका आप्टे) कंचन ने भी अच्छा काम किया है।

फिल्म को ए रेटिंग मिली है तो जाहिर है कि यह फैमिली क्लास की नहीं है। फिल्म में मारपीट और अंतरंग सीन भी हैं। इसके बावजूद नवाजुद्दीन सिद्दीकी के लाजवाब अभिनय और वरुण के बदले हुए अंदाज के लिए इस फिल्म को एक बार देखा जा सकता है।