18 December 2017, Mon

सपना जहां दस्तक ना दे, चौखट थी वो आंखें मेरी...

Created at March 26, 2016

सपना जहां दस्तक ना दे, चौखट थी वो आंखें मेरी…
Updated at March 26, 2016
 

अगर मैं आपके सामने संगीतकार अजय अतुल, सोनू निगम व अमिताभ भट्टाचार्य की तिकड़ी का नाम लूं तो बताइए आपके मन में उनका रचा कौन सा लोकप्रिय गीत उभरता है? अरे वही अग्निपथ का संवेदनशील नग्मा अभी मुझ में कहीं बाकी थोड़ी सी है जिंदगी जिसने वर्ष 2012 में संगीतप्रेमियों का दिल जीत लिया था। इन तीनों ने मिलकर पिछले साल आई फिल्म ब्रदर्स ले लिए एक बार फिर एक बेहद सार्थक, मधुर, सुकून देने वाला रोमांटिक नग्मा रचा है। मराठी संगीत के जाने माने चेहरे अजय अतुल से हिंदी फिल्म के श्रोताओं का परिचय अग्निपथ व सिंघम के माध्यम से हो चुका है। करण मेहरोत्रा की पहली फिल्म अग्निपथ की सफलता के पीछे उनके शानदार संगीत का भी बहुत बड़ा हाथ था। जाहिर सी बात थी कि अगली फिल्म के लिए भी बतौर संगीतकार उन्होंने अजय अतुल को चुना। तो आइए जानते हैं कि क्या कहना है संगीतकार जोड़ी का इस गीत के बारे में। तो पहले जानिए कि अतुल के विचार-
आजकल जिस तरह का संगीत बॉलीवुड में चल रहा है उसको देखते हुए बड़ा कलेजा चाहिए था सपना जहां जैसे गीत को चुनने के लिए। रोहित को एक भावपूर्ण गीत की जरूरत थी और उन्होंने इस धुन को चुना। रोहित हमारे मित्र की तरह हैं। हम जो भी करते हैं वो तभी करते हैं गर वो चीज हमें अच्छी लगती है। जब ये गाना बन रहा था उसी दिन मैंने कहा था कि ये भी अभी मुझ में कहीं… जितना ही गहरा व प्यारा गीत बनेगा। सोनू की आवाज की बुनावट में अक्षय की सी परिपक्वता है इसीलिए हमने इस गीत के लिए उनको चुना और क्या निभाया उन्होंने इस गीत को। वहीं अजय सोनू निगम की सहगायिका नीति मोहन के बारे में कहते हैं-
उनके गाए अब तक सारे गाने मुझे अच्छे लगे थे। तू रूह है की जो लय है उसे संभालते हुए बड़े प्यार से उन्हें गीत में प्रवेश करना था जो थोड़ा कठिन तो था पर उन्होंने बखूबी किया। ये गीत नायक की जिंदगी की पूरी कहानी को मुखड़ों और अंतरों में समा लेता है। गीतकार अमिताभ भट्टाचार्य को अपनों से अलग थलग एक बेमानी सी जिंदगी जीते हुए इंसान की कहानी के उस मोड़ की दास्तान बयां करनी थी जब वो नायिका से मिलता है और देखिए तो उन्होंने कितनी खूबसूरती से लिखा…सपना जहां दस्तक ना दे, चौखट थी वो आंखें मेरी…बातों से थीं तादाद में, खामोशियां ज्यादा मेरी…जबसे पड़े तेरे कदम, चलने लगी दुनिया मेरी। सहज शब्दों में काव्यात्मक अंदाज में कहीं बातें जो दिल को सहजता से छू लें अमिताभ के लिखे गीतों की पहचान हैं। मुखड़े में आगे भटकते हुए बादल की आसमान में ठहरने की बात तो पसंद आती ही है, पहले अंतरे में रूह के साथ काया, उम्र के साथ साया और बैराग के साथ माया की जुगलबंदी व सोच भी बतौर गीतकार उनके हुनर को दर्शाती है।
अजय अतुल का संगीत भी बोलों की नरमी की तरह ही एक मुलायमियत लिए हुए है। पियानों की मधुर धुन से नग्मा शुरू होता है। बीच में बांसुरी के इंटरल्यूड के आलावा गीत के साथ ताल वाद्यों की हल्की थपकी जारी रहती है। गीत का फिल्मांकन भी असरदार है तो कभी सुनिए इस प्यारे से गीत को अपने परिवार के साथ एक नया सपना बुनने के लिए…
सपना जहां दस्तक ना दे, चौखट थी वो आंखें मेरी
बातों से थीं तादाद में, खामोशियां ज्यादा मेरी
जबसे पड़े तेरे कदम, चलने लगी दुनिया मेरी, मेरे दिल में जगह खुदा की खाली थी
देखा वहां पे आज तेरा चेहरा है
मैं भटकता हुआ सा एक बादल हूं
जो तेरे आसमान पे आ के ठहरा है
तू रूह है तो मैं काया बनूं
ता-उम्र मैं तेरा साया बनूं
कह दे तो बन जाऊं बैराग मैं
कह दे तो मैं तेरी माया बनूं
तू साज हैं, मैं रागिनी
तू रात हैं, मैं चांदनी
मेरे दिल में… ठहरा हैं
हम पे सितारों का एहसान हो
पूरा, अधूरा हर अरमान हो
एक दूसरे से जो बांधे हमें
बाहों में नन्ही सी इक जान हो
आबाद हो छोटा सा घर
लग ना सके किसी की नजर
मेरे दिल में… ठहरा है
(लेखक सेल में अधिकारी व
ब्लॉग पर संगीत समीक्षा- यात्रा
लेखन में सक्रिय हैं)
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