18 December 2017, Mon

सामान्य की संभावनाएं चुक जाने के बाद असामान्य का रुख

Created at April 5, 2016

सामान्य की संभावनाएं चुक जाने के बाद असामान्य का रुख
Updated at April 5, 2016
 

बहुत सारी फिल्मों और टीवी प्रोग्रामों को देखते हुए क्या आपको भी ऐसा लगता है कि इनको क्यों बनाया गया है और कोई औसत  बुद्धि वाला इंसान भी इन्हें कैसे देख या झेल सकता है! उनका तर्कातीत होना, ऊल जुलूल होना, मूर्खतापूर्ण होना और अशालीन होना जैसे महज यह परखने लिए होता है कि उन्हें  देखते हुए आप अपना धैर्य खोते  हैं या नहीं! लेकिन जिन चीजों को देखते हुए आप कुढ़ते-चिढ़ते हैं उनका भी एक वफादार दर्शक समुदाय होता है। अगर न हो तो उन्हें बनाया ही न जाए! जो लोग इस तरह की फिल्में या प्रोग्राम बनाते हैं उनकी नजरें बॉक्स ऑफिस या टीआरपी पर टिकी होती हैं। अगर आप मनोरंजन की दुनिया के निकट अतीत को खंगालें तो पाएंगे कि इस तरह की निर्मितियों की अतार्किकता और बेहूदगी घटने की बजाय बढ़ी ही है, जो चीज दस-पांच बरस पहले कल्पनातीत थी आज वह इतनी आम हो चुकी है कि आपको चौंकाती तक नहीं है। क्या पता कि इन्हें बनाने वालों का संकट यह हो कि सामान्य की तो सारी संभावनाएं चुक गई हैं, इसलिए अब उन्हें असामान्य का ही रुख करना है।
इधर ब्रिटेन  से एक खबर यह आई है कि वहां के एक लोकप्रिय चैनल पर जो कि नई तरह के कार्यक्रम प्रस्तुत करने के जुनून में सीमाएं लांघ जाने के लिए जाना जाता है,  एक नया शो  लाया जा रहा है। इस शो का नाम है साइंस ऑफ अट्रेक्शन  यानि आकर्षण का विज्ञान, लेकिन कहते हैं न कि नाम में क्या रखा है? असल बात तो है शो की विषय वस्तु। तो यह एक डेटिंग शो होगा, लेकिन इसके निर्माताओं का कहना है कि यह अब तक के तमाम डेटिंग शोज से नितांत  भिन्न होगा। अब यह भी जान लीजिए कि इसमें भिन्न क्या होगा? इस शो के शुरू में आठ युवा स्त्री-पुरुषों को एक सी-थ्रू बक्से में रखा जाएगा! भौंडेपन के साथ नया यह होगा कि ये सबके सब एकदम निर्वस्त्र होंगे! इन आठ में से एक स्त्री और एक पुरुष वे होंगे जिन्हें शेष छह में से अपने लिए एक-एक साथी का चयन करना है। इस शो के शीर्षक को विज्ञान से जोडऩे के साथ ही गरिमा प्रदान करने के लिए इसमें एक साइकोलॉजिस्ट  को भी शामिल किया गया है जो प्रतियोगियों का मनोविश्लेषण प्रस्तुत कर इस शो में बौद्धिकता का तड़का लगाएगा। चुनाव करने वाले स्त्री-पुरुष एक-एक करके प्रतियोगियों को भिन्न-भिन्न मापदंडों  पर परखते हुए खारिज करते जाएंगे और अंत  में जब इन दोनों के लिए एक-एक साथी बचा रहेगा तो ये उसके साथ डेट पर चले जाएंगे।  यह पूरा शो कुल तीन राउंड्स में होगा। पहले राउंड की तो चर्चा हो ही चुकी  है। दूसरे राउंड में प्रतियोगियों को वस्त्र धारण करने होंगे और फिर उनका आकलन उनके ड्रेस सेंस के आधार पर होगा। तीसरे और अंतिम दौर में प्रतियोगी अपने-अपने बारे में बताएंगे और इस आधार पर उनके व्यक्तित्वों का विश्लेषण किया जाएगा। जिन दो प्रतिभागियों को अपने लिए साथी चुनने हैं वे भी अपनी बात कहेंगे और बताएंगे कि किसी को वे क्यों पसंद या नापसंद कर रहे हैं।
इस शो की विषय वस्तु के आधार पर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि शायद इसका नाम साइंस ऑफ  अट्रेक्शन  न होकर नेकेड अट्रेक्शन  रहे। इस अनुमान का एक आधार यह भी है कि अमरीका में डेटिंग नेकेड  शीर्षक वाला एक शो काफी कामयाब रह चुका है। लोकप्रिय तो ब्लाइंड डेट  शीर्षक कार्यक्रम भी काफी रहा है, लेकिन जिस शो की हम चर्चा  कर रहे हैं उसके निर्माताओं का दावा है कि उनका यह शो अब तक का सबसे अनूठा शो होगा। कहना अनावश्यक है कि अपने शो को अनूठा बनाने के क्रम में वे नग्नता और अश्लीलता से कोई दूरी नहीं बरतेंगे। अभी तक इस शो के जो प्रोमोज जारी हुए हैं उनसे भी इस बात की पुष्टि होती है और जैसे इतना ही पर्याप्त न हो, निर्माताओं की तरफ  से यह भी कहा जा चुका है कि इस शो में गे और लेस्बियन प्रतिभागियों पर भी एपिसोड होंगे।
पश्चिमी देशों में भी खुलापन होने के बावजूद एक बात सुखद है कि इस शो में निर्माताओं को प्रतिभागी जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इससे एक बात तो साफ जाहिर है कि खुलापन होने के बावजूद वहां लोग अपनी गरिमा दांव पर लगाने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन देर-सबेर प्रोग्राम तो बनेगा ही। मुझे फिक्र इस बात की सता रही है कि हमारे अपने देशी निर्माता जो हर विदेशी प्रोग्राम की नकल करने को आतुर रहते हैं, उन्हें इस प्रोग्राम से प्रेरणा ग्रहण करने से कौन रोकेगा और कब तक?
(लेखक वरिष्ठ  साहित्यकार एवं शिक्षाविद् हैं)