18 December 2017, Mon

स्वीडन ने आम नागरिकों को बनाया देश का राजदूत!

Created at April 12, 2016

स्वीडन ने आम नागरिकों को बनाया देश का राजदूत!
Updated at April 12, 2016
 

दुनिया का हर देश कोशिश करता है कि अन्य देशों के निवासी न केवल उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें, वह यह भी चाहता है कि अन्य देश उसके प्रति सद्भाना भी रखें। सद्भावना के प्रसार के लिए अनगिनत प्रयास किए जाते हैं। एक से दूसरे देश में शिष्टमंडल जाते हैं, कलाकारों का आदान-प्रदान होता है, राजनयिक गतिविधियां होती हैं, बड़े नेता एक दूसरे के देशों की सद्भावना यात्राएं करते हैं। ऐसे ही अन्य अनगिनत काम और प्रयास किए जाते हैं। कहना अनावश्यक है कि सद्भावना का यह प्रसार छवि को ही उजला नहीं बनाता है, व्यावसायिक संभावनाओं को भी पंख देता है।
महज दस लाख से भी कम आबादी वाला यूरोप महाद्वीप का देश स्वीडन दुनिया के सर्वाधिक शांत देशों में से एक माना जाता है, लेकिन इसी के साथ यह बात भी जोड़ देना उपयुक्त होगा कि दुनिया के ऐसे दस देशों की सूची में, जहां दुष्कर्म सर्वाधिक होते हैं, यह देश तीसरे नंबर पर आता है। भारत का नंबर इस देश के फौरन बाद यानि चौथा है, लेकिन संख्याओं का यह खेल खासा भ्रामक भी है। असल में तो स्वीडन दुनिया के उन देशों में अग्रणी है जहां स्त्री-पुरुष समानता सर्वाधिक है और स्त्रियों को अपनी बात कहने की और अपने लिए सुरक्षा पाने की सबसे अधिक सुविधाएं सुलभ हैं। यही कारण है कि स्वीडन में एक लाख की जनसंख्या पर दुष्कर्म के अड़सठ मामले दर्ज होते हैं, जबकि भारत में उसी एक लाख जनसंख्या पर मात्र दो मामले दर्ज होते हैं। यानि स्वीडन की यह  कुख्याति असल में उसके इस गुण की वजह से है कि वहां स्त्री किसी अन्याय को सहने की बजाय उसका प्रतिरोध करती है। तो इस तरह आंकड़े असल से भिन्न तस्वीर पेश कर डालते हैं। यथार्थ यह है कि 2014 की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट के अनुसार लैंगिक समानता के मामले में स्वीडन दुनिया के शीर्षस्थ देशों में शुमार है।
इसी स्वीडन देश के पर्यटन विभाग ने हाल ही में अन्य देशों के बीच अपने देश की छवि को और अधिक निखारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। आज उसी की चर्चा। स्वीडिश पर्यटन एजेंसी ने कॉलिंग स्वीडन नाम से एक सेवा शुरू की है जो पूरी दुनिया के लोगों को आमंत्रित करती है कि वे दिए गए नंबर पर कॉल करें तो उनकी बात किसी स्वीडिश नागरिक से होगी और उससे वे किसी भी मुद्दे पर बात कर सकेंगे। इसके लिए इस स्वीडिश एजेंसी ने एक विज्ञापन देकर अपने देश के नागरिकों को आमंत्रित किया कि वे एक एप डाउनलोड करें जिसके माध्यम से वे अगले दो महीनों तक किसी अनजान विदेशी से संवाद कर सकेंगे। अब जैसे ही कोई विदेशी उस दिए गए नंबर पर फोन करता है उसे आकस्मिक रूप से चुने गए किसी स्वीडिश नागरिक से जोड़ दिया जाता है और फिर वे दोनों किसी भी विषय या मुद्दे पर बात कर सकते हैं। अभी हाल ही में शुरू हुई इस सेवा से तीन हजार स्वीडी नागरिक जुड़ चुके हैं और साढ़े साथ हजार कॉल उन्हें प्राप्त हो चुके हैं।
समझा जा सकता है कि स्वीडिश पर्यटन एजेंसी ने इस योजना के माध्यम से अपने देश के आम नागरिक को भी अपना राजदूत बनाने का प्रयास किया है। यह  आशंका हो सकती है कि क्या पता कब कोई स्वीडी नागरिक ऐसी गैर जिम्मेदाराना हरकत कर जाए कि देश की छवि संवरने की बजाय बिगड़ जाए, मसलन वो अपने देश के बारे में कोई गलत बात कह दे, उसकी आलोचना कर दे या और कुछ नहीं तो सामने वाले से अशिष्ट बर्ताव ही कर डाले! इन आशंकाओं को पूरी तरह निर्मूल भी नहीं ठहराया जा सकता और ऐसा भी नहीं है कि स्वीडिश पर्यटन एजेंसी ने इन आशंकाओं को मद्देनजर नहीं रखा, लेकिन उसने बहुत सोच विचारकर बलपूर्वक यह कहा कि हर नागरिक नेक इरादों वाला होता है और हमें उस पर भरोसा करना चाहिए! वैसे स्वीडन में अपने देश वासियों पर भरोसा करने की परम्परा पहले से मौज़ूद है। मसलन, वहां एक आधिकारिक सरकारी ट्विटर खाता है जिसका संचालन हर सप्ताह एक भिन्न नागरिक करता है और उसे यह अधिकार होता है कि वह देश की तरफ  से किसी भी मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त करे। यह राय सकारात्मक भी हो सकती है और नकारात्मक भी।
है ना यह बहुत बड़ी बात! आखिर क्यों नहीं किसी देश को अपने आम नागरिक पर भरोसा करना चाहिए? स्वीडिश एजेंसी का यह सोच कि पेशेवर राजदूत का काम अपनी जगह, अगर उसी के साथ आम नागरिक को भी अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया जाए तो उसके बेहतर परिणाम सामने सकते हैं, दुनिया के और देशों के लिए भी अनुकरणीय न भी हो तो विचारणीय तो है ही।
(लेखक वरिष्ठ  साहित्यकार एवं शिक्षाविद् हैं)