18 December 2017, Mon

कृपया चोरों का साथ न दें, सावधानी बरतें

Created at April 13, 2016

कृपया चोरों का साथ न दें, सावधानी बरतें
Updated at April 13, 2016
 

सावधान! चोरों से पहले इस नुस्खा को आप पढि़ए। पुलिस की नौकरी के दौरान अर्जित चोरी के मुकदमों की तफ्तीश एवं सुपरवीजन के लंबे अनुभव के आधार पर बहुत कुछ कहा जा सकता है। टनों बातें ऐसी हैं जिन्हें जनहित में जगजाहिर नहीं किया जा सकता और मणों बातें ऐसी हैं, जिन्हें बहुत दफा जनहित में बताया जाता रहा है और अभी भी वक्त ऐसा ही है कि उन बातों को बिना देरी के बार बार बताया जाना चाहिए ताकि चोरी जैसे अपराधों की रोकथाम के लिहाज से जनता को जगाया नहीं जा सके तो बहुत देर तक घोड़े बेचकर सोने भी नहीं दिया जा सके। यह दीगर बात है अधिकांश लोगों के पास घोड़े होते ही नहीं हैं और हम वैसे ही कह देते हैं कि अमुक आदमी घोड़े बेचकर सो रहा है। बहरहाल हाथी, घोड़े, पालकी वाले दृश्य राजशाही के अंत के संग ही समाप्त हो गए। अब तो जो कुछ है उसी को संभालकर रखने का जमाना है। वैसे भी औसत हिन्दुस्तानी के पास एक घर हो वही लग्जरी है। हम कोई माल्या वाल्या तो हैं नहीं जिनकी अनेक कोठियां देश-विदेश में होती हैं, जिनमें वे अपनी सही गलत कमाई को छिपाकर रखने में कामयाब हो जाएं।
अक्सर मैंने और मेरे जैसे पुलिसवालों ने अनेक बार देखा है कि घर के लोग किस तरह से चोरों के लिए प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सुविधाजनक स्थिति बनाकर चलते हैं। चोर को इतनी ही तकलीफ  उठानी होती है कि वह उस घर तक पहुंच जाए, जिस घर में चोरी करनी है और उस गंतव्य तक जाने में कोई रोक-टोक नहीं होती चूंकि जब तक कोई शख्स चोरी नहीं कर लेता तब तक वह पूरा साहूकार होता है। इससे भी आगे, वो कहते हैं न कि चोरी पकड़ी जाने पर ही चोर का मुद्दा सामने आता है। कोई बंदा जब तक नहीं पकड़ा जाए तब तक वह उसके ऊपर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। ईमानदार घरवालों द्वारा चोरों की राह किस कदर आसान कर दी जाती है। इसके कुछ नमूने यहां पेश किए जा रहे हैं। यह ध्यान रखते हुए कि ऐसे लोगों के नाम उनके हित में गोपनीय रखे रखे जाएंगे। मकान के सदर दरवाजे की चाबी गेट के अंदर किसी पत्थर के नीचे प्राय: दबाकर रखी जाती है ताकि पहले आने वाले किसी सदस्य को असुविधा नहीं हो। यह सुविधा चोरों को तब दी जाती रही है जबकि घर के ताला लगाया जाता है। मकान के भीतर एक अथवा एकाधिक सदस्य होते हैं और वो जाग नहीं रहे हैं अथवा कि पूरी तरह से सोये हुए हैं तो बदमाशों को उस कमरे में प्रवेश करना है, जिसमें कीमती सामान रखने की संभावना बनती है। इस बात का अंदाज़ा पेशेवर चोर सरलता से लगा सकते हैं। अपने सामान की सुरक्षा के प्रति शहरी-ग्रामीण, शिक्षित-अशिक्षित, धनी-निर्धन, छोटे-बड़े सब लोगों की मानसिकता एक सी होती है, जैसे शहरी बाजार में जाने वाला ग्रामीण अपनी धोती की अंटी को हाथ से बार-बार संभालता रहता है, जहां रुपया रखा हुआ है। जेबकतरे आसानी से भांप जाते हैं और वहीं हाथ साफ करते हैं।
किसी घर में चोरी के मकसद से घुसने वाले बदमाश कमरे में प्रविष्ट होने के बाद डबलबेड पर बिछे गद्दा के सिरहाने के नीचे टटोलते हैं, जहाँ प्राय: आलमारी की चाबियां रखी होती हैं। चोर लोग आलमारी खोलते हैं। उन्हें भलीभांति पता होता है कि आलमारी के लॉकर की चाबी या तो उसी गुच्छे में शामिल मिलेगी अन्यथा आलमारी के भीतर के उस स्थान पर मिलेगी, जिसे चोरों ही क्या साहूकारों द्वारा भी बिना किसी माथापच्ची के पहचाना जा सकता है। अब सुरक्षित लॉकर को उसी की चाबी से सौ लापरवाहियों के चलते सहजता से खोला जाकर उसमें रखी मूल्यवान वस्तुओं को अपने कब्जा में किया जा सकता है। अंतत: उस मकान से चोरों के बाहर निकलने के समस्त द्वार आसानी के साथ पार किए जा सकते हैं। जहां से प्रवेश किया गया वहां से भी निकला जा सकता है अथवा जहां नकब लगाया गया वहां से भी।
(लेखक साहित्यकार एवं
सेवानिवृत्त आईजी  हैं।)