24 September 2017, Sun

माफिया की मनमानी

Created at April 28, 2016

माफिया की मनमानी
Updated at April 28, 2016
 

प्रदेश भर में और शहर में कई स्थानों पर शराब की दुकानों को बंद करवाने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, फिर भी शराब माफिया है कि अपनी मनमानी से नियमों को ताक में रख कर दुकानें खोल रहे हैं और सरकारी कारिंदे मानों हाथी के कान में सो रहे हैं। यह साबित हो रहा है द्रव्यवती नदी की जमीन पर कब्जा कर माफिया द्वारा आनन-फानन में कमरा बनवाकर शराब ठेका चालू करने की घटना से। हाल ही में गोपालपुरा बाईपास पर गुर्जर की थड़ी के पास शराब माफिया ने द्रव्यवती नदी की जमीन पर कब्जा कर शराब का ठेका खोला है। इसके बारे में जेडीए के अधिकारी अभी तक अनभिज्ञ हैं और जांच करवाने की बात कह रहे हैं। तुर्रा तो यह कि जेडीए ने इसी द्रव्यवती नदी के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 1750 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बनाया है। यहां दिन दहाड़े अतिक्रमण कर नदी की जमीन को पाट कर कमरे का निर्माण करवाने के बाद शराब का ठेका चालू हो गया और जेडीए के अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। इस वाकये ने जेडीए की कार्यशैली और सौंदर्यीकरण के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इसके साथ ही आबकारी विभाग को भी यह चिंता नहीं है कि उसके द्वारा आवंटित दुकान कहां खुल रही है, जबकि नियमानुसार दुकान आवंटन से पहले दुकान का नक्शा और किरायानामा लिया जाता है। फिर भी आवंटी द्वारा दूसरे स्थान पर दुकान खोलना गैर कानूनी है। लेकिन आबकारी विभाग को यह जानने की फुरसत ही नहीं है कि आवंटन की गई दुकान निर्धारित स्थान पर खुली है या कहीं और। इन सब कारनामों के पीछे ठेकेदार और सरकारी मुलाजिमों की मिलीभगत की बू आती है। इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार को नियमों का कड़ाई से पालन करवाने के लिए अफसरों को सख्त निर्देश देने चाहिए तथा कसूरवारों को कड़ी सजा का प्रावधान करना चाहिए। साथ ही आमजन को भी सजग रह कर ऐसी करतूतों का विरोध करना होगा।