23 July 2017, Sun

बस मजा आ गया!

Created at April 29, 2016

बस मजा आ गया!
Updated at April 29, 2016
 

नेता भरोसी लाल और गुंडा दुर्जन सिंह दोनों बैठे दारू पी रहे थे। जब नशा चढऩे लगा तो गुंडा बोला- कहो गुरु! कैसी छन रही है? नेता बोला- क्या खाक छन रही है! इस बार चुनाव में हार गया हूं। जनाधार खत्म हो रहा है। लड़कों के पास डिग्रियां तो हैं, लेकिन इतने योग्य नहीं हैं कि कम्पीटिशन में नौकरी हासिल कर सकें। गुंडा बोला- उस्ताद आपकी नेतागिरी को धार देने की जरूरत है। इतने में ही गबदू आकर नेता को हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया। नेता बोला- क्या बात है गबदू? गबदू बोला – नेताजी आप हमारी जात के लीडर हो। मैं तो आम आदमी हूं। मेरे बेटे-बहुओं के पास न नौकरी है और न ही कोई काम धंधा। अब आप ही मदद नहीं करोगे तो कौन करेगा? गबदू की बात सुनकर नेता की आंखें चमकने लगी। बोला- गबदू! अपनी जात को आरक्षण नहीं है, इसलिए अपनी जात दु:खी है। तू अपनी जात के तमाम लोगों को एकत्र कर। सरकार से आरक्षण लेंगे। फिर अपनी जात वाले भी ज्यादा नौकरियां हासिल करेंगे। गबदू सीधा और भोला था। वह जात वालों को एकत्र करने चला गया। गुंडा पूरी बोतल ही मुंह में उंडेल कर बोला- गुरु! मजा आ गया। आरक्षण लेकर रहेंगे। नेता बोला- तू मेरी मदद करेगा? भीड़ होगी तो श्रेय लेने के लिए कई नेता सत्तापक्ष के भी आ जाएंगे। गुंडा बोला- गुरु चिंता मत करो! वह हुड़दंग मचाऊंगा कि सरकार पनाह मांगती फिरेगी, लेकिन थोड़ा ऊंचा-नीचा हो जाए तो संभाल लेना। नेता बोला- चिंता मत कर। तुझे पूरी छूट है। बस अपनी नेतागिरी चमकनी चाहिए। फिर क्या था? गबदू ने पूरी जात एकत्र कर ली। नेता भाषण करने लगा। ‘आरक्षण-आरक्षणÓ चिल्लाने लगा। उसके साथ भीड़ भी चिल्लाने लगी। गुंडा और उसके साथी रेल की पटरियां उखाडऩे लगे, बसें जलाने लगे। उनके साथ भीड़ भी वही सब करने लगी। गुंडों को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई। वे आम आदमियों को लूटने लगे। उनकी बहू-बेटियों के साथ दुष्कर्म करने लगे। उन्होंने गबदू की बहुओं को भी नहीं छोड़ा। वह कोहराम मचा कि सरकार त्राहिमाम्-त्राहिमाम् करने लगी। असहिष्णुता नहीं मानने वाले बड़बोले देशभक्त जाने किस बिल में जा घुसे कि ढूंढे भी नहीं मिले। सरकार ने सब मांगें मान ली। पुलिस भी आई, लेकिन गुंडे सब भाग चुके थे। पुलिस की गोलियों से कई आम आदमी मारे गए। कुछ को पकड़ कर जेल में डाल दिया। गबदू का एक बेटा मर गया, बाकी जेल चले गए। उसकी बहुएं कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही। गई रात नेता और गुंडा फिर दारू पीने बैठे। गुंडे ने पूछा- कहो गुरु कैसी रही? नेता बोला- बहुत अच्छी रही। मेरी नेतागिरी चमक गई और शायद लड़कों को भी आरक्षण की बदौलत नौकरी मिल जाएगी। बस मजा आ गया। गुंडा बोला- आपके लड़कों को ही नहीं, सभी साधन संपन्न लोगों के लड़कों को नौकरियां मिल जाएंगी। रोयेगा तो गरीब, क्योंकि वह अपनी संतानों को कंपीटिशन की तैयारी भी नहीं करा सकता।