24 September 2017, Sun

बदहाल तीसरी आंख

Created at April 29, 2016

बदहाल तीसरी आंख
Updated at April 29, 2016
 

राजधानी में सुरक्षा के लिए लगाए सीसीटीवी कैमरे देख-रेख के अभाव में बंद हो चुके हैं। कई थाना क्षेत्रों में अब तक सीसीटीवी कैमरों के कनेक्शन तक नहीं किए गए हैं। राजधानी में बेहतर सुरक्षा का दावा करने वाली अपनी पुलिस की कार्यशैली का यह नमूना भर है। राजधानी में 2008 में हुए बम धमाकों के बाद सुरक्षा के लिए परकोटे सहित कई स्थानों पर कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के माध्यम से शहर पर नजर रखी जानी थी, लेकिन लापरवाही व अनदेखी के चलते ये तीसरी आंख बने कैमरे बदहाली का शिकार बन गए। इसके अलावा जो कैमरे लगाए गए थे वे इतनी घटिया क्वालिटी के हैं कि जूम करने पर इनमें लोगों का चेहरा तक साफ दिखाई नहीं देता है। प्रदेश में सुरक्षा को लेकर इतनी सजगता है कि सरकार बातें तो बड़ी-बड़ी करती है, लेकिन जब क्रियान्वयन का नंबर आता है तो बजट नहीं होने का रोना रो दिया जाता है। ऐसा ही हाल राजधानी में लगे सीसीटीवी कैमरों के मामलों में हुआ। बाद में थानाधिकारियों ने स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से कैमरे लगवाए भी, लेकिन देखभाल नहीं होने से ये काम नहीं कर रहे। सरकार को राजधानी की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना चाहिए और शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्रों, महत्वपूर्ण स्थलों पर व्यक्तिगत मॉनिटरिंग के साथ-साथ कैमरों से भी नजर रखी जानी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति को समय रहते रोका जा सके और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।