25 February 2017, Sat

लापरवाही की हद

Created at April 30, 2016

लापरवाही की हद
Updated at April 30, 2016
 

राजधानी के नजदीक जामडोली स्थित विमंदित गृह की तस्वीर भयावह है। संबंधित विभाग के मंत्री ने दौरा भी किया, लेकिन मंत्री को वही दिखाया गया, जो वे देखना चाहते थे। जबकि इस गृह के हालात एकदम विपरीत है। राजधानी के नजदीक लापरवाही के चलते विमंदित बच्चों की मौत होना अपने आप में सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। इस गृह के हालात देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन अक्षम बच्चों के जीवन के साथ किस तरह से खिलवाड़  किया जा रहा था। इन बच्चों का जीवन बेहतर बनाने के लिए इन्हें यहां रखा गया, लेकिन इन बच्चों को यह नहीं पता था कि सरकार उन्हें मौत के मुंह में धकेल रही है। इस पर संबंधित मंत्री का बयान सरकार की ऐसे बच्चों के प्रति सोच को भी बयां करती है। हालांकि मंत्री महोदय ने बच्चों की मौत के बाद वहां जाकर हालात देखे हैं, लेकिन वहां जो दयनीय स्थिति है उसमें वहां रह रहे बच्चे शौचालय उपयोग का पानी पीने को मजबूर हैं, इन बच्चों को पोषित भोजन नहीं दिया जा रहा है और इनके उपचार में भी लापरवाही बरती जा रही है। मंत्री और अधिकारी इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं। सरकार ने अक्षम बच्चों के लिए विमंदित गृह तो खोल दिया, लेकिन बच्चों की देख-रेख पर बड़े पैमाने पर लापरवाही बरती गई और इस कारण बच्चे मौत के मुंह में समा गए। सरकार को अगर यहां के हालात सुधारने हैं तो सबसे पहले कार्यशैली सुधारनी होगी और जो यहां अब तक हो रहा है उसे बदलना होगा। साथ ही इस मामले में दोषी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी और इनके खिलाफ मामले दर्ज करवाकर इन्हें सजा दिलवानी होगी। क्योंकि इन लोगों की लापरवाही ही मासूमों पर भारी पड़ी।