24 September 2017, Sun

तुम मेरे संग हंस लो

Created at April 30, 2016

तुम मेरे संग हंस लो
Updated at April 30, 2016
 

पाठको। जल्दी-जल्दी हंस लो। हंसी का कोटा बड़ा सीमित है। इक्कीसवीं सदी में हंसी राशन कार्डों पर मिलेगी और उसके लिए लाइन में खड़ा होना पड़ेगा। शायद आप सोच रहे होंगे ये कौन सिरफिरा हंसने की बात कर रहा है। यहां चेहरे पर एक मिलीमीटर मुस्कान नहीं मिलती है और आप हैं कि साठ सेंटीमीटर ठहाके की बात कर रहे हैं। मगर भाई साहब, जरा ठहरिये और हंसी का महत्व समझिये। आप नहीं जानते। मामूली मुस्कराहट आपकी रूठी बीवी को मना सकती है। गायब प्रेमिका से मिलवा सकती है। आपके बॉस को खुश कर सकती हैं। आपकी महिला सहकर्मियों को खुश कर सकती है और हो सकता है बॉस आपकी मुस्कराहट से खुश होकर आपको प्रमोशन दे दे । अत: हे पाठक, जरा जल्दी-जल्दी हंसो, हंसी और फंसी, मुस्कराई और जेब में आई, जैसे वाक्यों का शीघ्र ही पूरे देश में रेडियो और टीवी के मार्फत प्रचारित किया जाएगा। हर दफ्तर में एक घंटे तक हंसने के विशेष कार्यक्रम रखे जाएंगे ताकि ऑफिस की कार्य क्षमता का विकास हो सके। डॉक्टरों का कहना है कि हंसने से मानसिक तनाव कम हो जाता है। दुनिया में हंसोड़ों की कोई कमी नहीं है। आप भी हंसिये, हंसाइये और खुश रहकर इस जीवन के मानसिक तनाव को भूल जाइए। हंसी के कई प्रकार हैं। कोई केवल मुस्कराता है। कोई छतफाड़ ठहाका लगाता है। हिन्दी में हास्यकारों की कमी भले ही एक दूसरे पर हंसने वालों और एक दूसरे की हंसी करने वालों की कतई कमी नहीं है। आखिर हंसना मजबूरी क्यों है, लाचारी क्यों, बेचारगी क्यों है? शायद इसीलिए समाज किसी कमजोर पात्र के सहारे हंसता है और वो पात्र बरसों इस बात को समझते हुए भी समाज की हंसी में साथ देता है। शायद आप नहीं जानते कि पेड़, पौधों, जीव, जन्तुओं सभी में केवल मनुष्य की हंस सकता है। क्या आपने कभी किसी कुत्ते या गधे को हंसते हुए देखा है? आप का जवाब होगा नहीं। मगर मेरा जवाब है कि हां देखा है – नेता को देखो वो हंसते हुए भी कुत्ता या गधा ही लगता है। हंसने से आपका कुछ बिगड़ेगा नहीं। आपको कुछ फायदा ही होगा। खूब हंसो। जल्दी-जल्दी हंसो। आपकी हंसी कोमल और स्वच्छंद होती है। कहा भी है हम हंसते है तो किसी का क्या लेते हैं। स्वयं पर हंसने वाला बड़ा आत्मविश्वासी होता है। भारत में हास्यवृत्ति की तारीफ  होती है और अंत में आपको बताऊं की एक भारतीय विद्वान ने लाफिंग मेटर्स नाम की एक पुस्तक शिकागो से छपाई है, जो भारतीय जीवन की हंसी पर बहुत गहरे विचार कर हमें हंसने को मजबूर कर देती है। हंसिये, जल्दी-जल्दी हंसिए क्योंकि हंसी मानव जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।