27 May 2017, Sat

सभी की उम्मीदों पर खरी उतरती 'दंगल'

Created at December 23, 2016

सभी की उम्मीदों पर खरी उतरती ‘दंगल’
Updated at December 23, 2016
 

मुंबई। बॉलीवुड को ‘चिल्लर पार्टी ’ और ‘भूतनाथ रिटर्नस ’ जैसी सफल फिल्में दे चुके निर्देशक नितेश तिवारी अब आमिर खान स्टारर फिल्म ‘दंगल ’ लेकर आए हैं। उन्होंने इसमें महिलाओं पर आधारित कुश्ती पर फोकस किया है और नितेश ने फिल्म को सफल बनाने के लिहाज से हर संभव प्रयास भी किया है।

 

कहानी :
‘दंगल ’ की कहानी महावीर फोगट (आमिर खान) से शुरू होती है, जिन्हें लगता है कि देश पहलवानी में पिछड़ रहा है और इसी वजह से देश के खाते में कुश्ती में गोल्ड मेडल नहीं मिल पाया। यही बात महावीर को चुभ जाती है और वो किसी भी हाल में देश को गोल्ड मेडल दिलवाना चाहता है। क्योंकि खुद वो पहलवानी छोड़ चुके हैं तो वे अपने बच्चों से उम्मीद करते हैं, लेकिन पहलवान होने के लिए लड़का होना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ महावीर के मंसूबों पर पानी तब फिर जाता है, जब उनके घर में एक के बाद एक चार लड़कियां पैदा होती हैं। लेकिन यह बात महावीर को समझ में जल्दी ही आ जाती है कि गोल्ड मेडल तो गोल्ड मेडल है, लड़का जीते या लड़की। दंगल में देश भक्ति है, खेल के प्रति जज़्बा है, एक बाप का बेटी को, बेटे का दर्जा दिलाने का संघर्ष है, बेटियों का पिता के प्रति समर्पण है और खिलाड़ी का अपने गुरु के प्रति विश्वास होता है। अब महावीर अपनी दोनों लड़कियों दोनों लड़कियों गीता फोगट (फातिमा सना शेख) और बबिता कुमारी (सान्या मल्होत्रा) को कुश्ती में महारत हासिल कराने के लिए दिल-ओ-जान से जुट जाता है। इसी के साथ दिलचस्प मोड़ लेते हुए फिल्म आगे बढ़ती है।

 

अभिनय :
आमिर खान ने वाकई में अपनी वर्षों की मेहनत इस फिल्म में झोक दी है। उन्होंने फिल्म में हकीकत लाने के लिए किसी भी तरह की कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी है। वे एक पिता के तौर पर फिल्म में कई मायनों में खरे उतरे हैं। साथ ही साक्षी तंवर ने भी आमिर का साथ भरपूर दिया है। फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा की भले ही पहली फिल्म हो, लेकिन दोनों के अभिनय को दखते हुए कोई नहीं कह सकता कि यह उनकी बॉलीवुड में एंट्री की पहली फिल्म है। जायरा वसीम, रोहित शंकरवर ने भी अपने-अपने अभिनय में शत-प्रतिशत देने की भरपूर कोशिश की है। सुहानी भटनागर, विवान भटेना, अपरशक्ति खुराना समेत राजकुमार राव ने भी अपनी-अपनी भूमिका बखूबी निभाई है।

 

निर्देशन :
निर्देशक नितेश तिवारी ने वाकई में इस फिल्म में भी कुछ अलग और देश को एक नया मैसेज देने का पूरा प्रयास किया है। उन्होंने अपनी पूरी लगन और ईमानदारी के साथ फिल्म में न्याय किया है। जी हां, इस फिल्म में कई सीन्स हैं जहां न बैकग्राउंड स्कोर का सहारा लिया गया है न ही किसी अन्य इफेक्ट का, फिर भी वो दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि अपनी छाप छोड़ जाते हैं। खासतौर से कुश्तियों के दृश्य जहां सिर्फ दर्शकों की आवाज का इस्तेमाल है। बायोपिक के मामले में नितेश ने वाकई में कुछ अलग कर दिखाने की कोशिश की है, जिसकी वजह से वे दर्शकों की वाहवाही लूटने में कई मायनों में सफल रहे। अमिताभ भट्टाचार्य की उम्दा लिरिक्स और सिनेमेटोग्राफी इस फिल्म को सीधे दिल में उतारती है। इसके अलावा फिल्म में संगीत (प्रीतम) की भी अहम भूमिका रही, जिसकी वजह से हरियाणवी खुशबू बनी रहती है।

 

क्यों देखें :
आमिर खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म अब तक की बेहतरीन फिल्मों में से एक है, जिसे देखने के लिए आप बेझिझक सिनेमाघरों की ओर रुख कर सकते हैं। आगे मर्जी और जेब आपकी…!

बैनर : वाल्ट डिजनी पिक्चर्स, आमिर खान प्रोडक्शंस, यूटीवी मोशन पिक्चर्स

निर्माता : आमिर खान, किरण राव, सिद्धार्थ रॉय कपूर
निर्देशक : नितेश तिवारी
जोनर : बायोपिक
संगीतकार : प्रीतम
स्टारकास्ट : आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख, जायरा वसीम, सान्या मल्होत्रा, रोहित शंकरवर, सुहानी भटनागर, विवान भटेना, अपरशक्ति खुराना, राजकुमार राव
रेटिंग : **** स्टार