23 July 2017, Sun

बुजुर्गवार के साथ आंख मिचौनी खेल गई मौत

Created at January 10, 2017

बुजुर्गवार के साथ आंख मिचौनी खेल गई मौत
Updated at January 10, 2017
 

इंदौर। जिंदगी कभी-कभी बड़े अजीब खेल खेलती है, पल-पल में रंग बदल देती है। ऐसा ही वाकया एक बुजुर्ग हाफिज साहब के साथ हुआ। कल शाम निजी अस्पताल में मृत घोषित किए जाने के बाद शव ४-५ घंटे तक पड़ा रहा। अंतिम यात्रा निकाले जाने से ऐन पहले सांसें चलने लगीं तब उन्हें बड़े अस्पताल लाया गया। वहां काफी देर उपचार चलने के बाद उनकी दिल की धड़कनें हमेशा के लिए थम गईं।
रावजी बाजार इलाके के कटकटपुरा जूनी इंदौर निवासी मोहम्मद हाफिज सरदार पिता नबी बक्श (65) पिछले सप्ताह अजमेर गए थे। वहां उनकी तबियत खराब हुई तो उन्हें इंदौर लाकर लाइफ लाइन हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। सोमवार की सुबह हालत और बिगड़ी तो उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया। कल शाम करीब 7 बजे अस्पताल में डॉक्टर ने उनकी मौत की घोषणा कर दी। तब उनके शव को घर लाकर उनकी मय्यत निकलने की तैयारी की जा रही थी। सभी रिश्तेदार व पड़ोसी घर पर जमा हो गए थे। उनका शव कई घंटों जमीन पर पड़ा रहा था। जब उनकी मय्यत उठाई जाने लगी थी कि तभी बुज़ुर्गवार के शरीर में हरकत होने लगी। गौर से देखा तो पता चला कि 4 घंटे से बंद उनकी सांसें अचानक फिर से चलने लगीं। शरीर में हरकत होती देख वहां पसरा गमी का माहौल खुशी में बदल गया। उन्हें जीवित पाकर खुश हुए परिजन तत्काल उन्हें गाड़ी में डालकर एमवाय अस्पताल ले गए थे। अस्पताल की कैजुअल्टी में डॉक्टर द्वारा की गई प्राथमिक जांच में उनके दिल की धड़कनें चलती देख तुरंत उपचार शुरू किया। बाहर बड़ी तादात में लोग इकठ्ठा हो गए, लेकिन फिर तभी अचानक जिंदगी ने फिर से रंग बदला। करीब पौन घंटे इलाज किए जाने के बाद उनकी सांसें थम गईं। डॉक्टर ने ईसीजी करवाया तो पता चला कि आखिरकार वो बुज़ुर्गवार अल्लाह को प्यारे हो ही गए।