18 December 2017, Mon

सुधारें पटवार भवन

Created at January 17, 2017

सुधारें पटवार भवन
Updated at January 17, 2017
 

सरकार गांवों के विकास की बातें तो खूब करती है, लेकिन गांवों के पटवार भवनों को देखकर विकास की तस्वीर का अंदाजा स्वत: लगाया जा सकता है। जबकि पटवार भवन से ग्रामीणों का सीधा जुड़ाव होता है। ग्रामीणों को राजस्व संबंधी कोई भी कार्य करवाना होता है तो उन्हें पटवारी के पास जाना पड़ता है। लेकिन आज पटवार भवन जीर्ण-शीर्ण होने के कारण खंडहर बनते जा रहे हैं, जहां बैठना किसी के भी लिए मुनासिब नहीं है। बस्सी उपखंड क्षेत्र के पाटन और भटेरी ग्राम पंचायत इसके उदाहरण है। एेसे में पटवारी पटवार भवन में बैठने की बजाय मुख्यालय में बैठते हैं और कभी-कभार गांव की तरफ रुख करते हैं। लेकिन संबंधी गांवों के ग्रामीणों के लिए मुख्यालय दूर पड़ता है और खर्चा भी अधिक वहन करना पड़ता है। जब गांवों में पटवार भवन मौजूद है तो फिर उनकी दायनीय स्थिति को सुधारने के लिए सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठा रही है। ग्राम पंचायतें भी इनसे विमुख सी नजर आ रही है। किसानों को ट्यूबवेल लगवाने, कृषि ऋण लेने के लिए पटवारी से रिपोर्ट लगानी पड़ती है। भूमि का सीमाज्ञान, जमाबंदी भी बिना पटवारी के नहीं हो पाती है। फसलों के नुकसान होने पर भी पटवारी खेतों का निरीक्षण करते हैं। लेकिन उन्हें भी जर्जर पटवार भवनों में बैठने से डर सताता होगा। बात साफ है अगर गांवों का विकास करना है तो पटवार भवनों की स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।