18 December 2017, Mon

आईडीए को अब भी नहीं मिलेगा जमीन का कब्जा

Created at July 6, 2017

आईडीए को अब भी नहीं मिलेगा जमीन का कब्जा
Updated at July 6, 2017
 

इंदौर। स्कीम-५३ में जिस जमीन के केस का फैसला आईडीए के हक में आया, उसमें अब भी एक केस पेंडिंग है। प्राधिकरण अभी केवल जमीन मालिक से जीता है, जबकि जमीन पर असल कब्जा रघुवंशी (कालिंदी) हाउसिंग सोसायटी का है। संस्था का केस अभी चल ही रहा है। जमीन पर भौतिक कब्जा संस्था का ही है, ऐसे में प्राधिकरण को फिलहाल जमीन का कब्जा नहीं मिल पाएगा।

प्राधिकरण भले ही केस जीत गया हो, लेकिन जमीन का कब्जा लेने और नई स्कीम लाने के रास्ते में अभी कई अड़चनें हैं। दरअसल पूरा मामला हाउसिंग सोसायटी और प्राधिकरण के बीच चल रहा है। जमीन मालिक की तरफ से तो याचिका केवल इसलिए लगाई गई थी कि योजना खत्म हो गई थी। संस्था की तरफ से लगाए गए प्रकरण में कई ऐसे तथ्य हैं, जिनके आधार पर संस्था न सिर्फ आईडीए से एनओसी मांग रही है, बल्कि जमीन का कब्जा भी नहीं छोड़ रही। मौके पर स्टील की चद्दरों से घेराबंदी संस्था की तरफ से ही की गई है और यहां बोर्ड भी लगा है, जो बताता है कि जमीन पर संस्था का कब्जा है। चूंकि संस्था के केस का निराकरण अब तक नहीं हो पाया है, इसलिए प्राधिकरण भले ही यह कहे कि जमीन का कब्जा वे पहले से ले चुके हैं, लेकिन असल में भौतिक कब्जा उन्हें अब तक नहीं मिला है। यह केस जीतने के बाद भी कब्जा लेने की कार्रवाई नहीं कर पाएंगे।

चेयरमैन का आदेश है अनुबंध खत्म करने का

इस पूरे मामले में रघुवंशी हाउसिंग सोसाइटी के साथ हुए प्राधिकरण के अनुबंध को खत्म करने का आदेश भी आईडीए चेयरमैन की हैसियत से कमिश्नर संजय दुबे दे चुके हैं। १४ अगस्त २०१३ में उन्होंने यह आदेश दिया था कि संस्था के साथ अनुबंध खत्म कर वैधानिक कार्रवाई करें, लेकिन इस आदेश को प्राधिकरण के अफसरों ने दरकिनार कर दिया। इसको लेकर पीएमओ से लेकर सीएम तक शिकायत की जा चुकी है।

संस्था की तरफ से लोकायुक्त में शिकायत

चेयरमैन के आदेश का पालन न करने और इस आदेश को लेकर गलत व भ्रमपूर्ण जानकारियां देने के मामले में ही संस्था के सदस्यों ने सीईओ और भूअर्जन अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत की थी। बाद में इसमें चेयरमैन और पूरे संचालक मंडल को शामिल कर लिया गया था। कोर्ट केस तो पेंडिंग है ही, लोकायुक्त की जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है।